भक्तों के कल्याण हेतु आध्यात्मिक मार्गदर्शन
माँ बगलामुखी तंत्र की महाविद्या हैं, जो शत्रु नाश, वाणी सिद्धि, बाधा निवारण एवं विजय प्रदान करती हैं। उनकी साधना अत्यंत श्रद्धा, संयम और शुद्धता से करनी चाहिए।
साधना से पूर्व निम्न बातों का विशेष ध्यान रखें:
साधना स्थान को स्वच्छ करें।
माँ बगलामुखी की प्रतिमा या यंत्र पूजा स्थान पर स्थापित करें।
स्वयं हल्के पीले वस्त्र धारण करें।
पीले रंग का आसन बिछाकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
घी का दीपक और अगरबत्ती प्रज्वलित करें।
सबसे पहले श्रद्धापूर्वक आचमन करें।
इसके बाद अपने उद्देश्य के अनुसार संकल्प लें —
इसके बाद श्रद्धापूर्वक निम्न को प्रणाम करें:
गुरु से प्राप्त मंत्र को ही श्रेष्ठ माना जाता है।
यथाशक्ति 1 माला, 3 माला, 5 माला या 11 माला प्रतिदिन करें।
जप नियमित, एक ही समय और एक ही स्थान पर करें।
माला स्फटिक या हल्दी की हो तो उत्तम।
जप के साथ-साथ एक पात्र में शुद्ध जल रखें। जप पूर्ण होने पर उस जल को अपने पीछे छोड़ दें, फिर उसी जल को आँखों से लगाएँ।
यह साधना परंपरा में बताई जाने वाली एक आध्यात्मिक भावना है। साधना सदैव श्रद्धा, शुद्धता और उचित मार्गदर्शन के साथ करें।
माँ बगलामुखी मंत्र साधना से संबंधित मार्गदर्शन एवं आध्यात्मिक जानकारी वीडियो के माध्यम से देखें।
“हे माँ बगलामुखी!
यदि मेरे जप में कोई त्रुटि हुई हो,
उच्चारण में दोष हुआ हो,
या विधि में कमी रह गई हो,
तो कृपा कर क्षमा करें।
मेरे जप को स्वीकार करें
और मुझे अपनी शरण में रखें।”
साधना के दौरान ब्रह्मचर्य, सात्त्विक आहार और संयम रखें।
नकारात्मक विचार, क्रोध और अहंकार से दूर रहें।
साधना को प्रदर्शन नहीं, आत्मकल्याण के लिए करें।
यह साधना विधि भक्तों के कल्याण हेतु माँ बगलामुखी धाम, जयपुर के पीठाधीश्वर आशुतोष बगलामुखी महाराज जी के मार्गदर्शन में प्रस्तुत की जा रही है।
श्रद्धा, विश्वास और निरंतरता — यही माँ बगलामुखी की साधना की सबसे बड़ी सिद्धि है।
”आप सभी साधकों पर माँ की कृपा सदा बनी रहे।