Mantra

॥ माँ बगलामुखी मंत्र साधना ॥

माँ बगलामुखी के दिव्य मंत्र एवं शक्तिशाली साधना

माँ बगलामुखी की पूजा में विशेष रूप से शत्रुनाश, संकट निवारण, विचारों की शांति, और सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति के लिए मंत्रों का जाप किया जाता है। बगलामुखी माता के मंत्र अत्यधिक शक्तिशाली होते हैं और इनका जाप करने से व्यक्ति को मानसिक शांति, जीवन में समृद्धि, और शत्रुओं से रक्षा मिलती है।

माँ बगलामुखी मुख्य मंत्र

जय माँ बगलामुखी — दिव्य भजन

॥ जय माँ बगलामुखी ॥ जय माँ बगलामुखी, जय माँ बगलामुखी, तेरी महिमा सबसे न्यारी। पीताम्बरा माँ शक्ति स्वरूपा, तू ही जग की पालनहारी॥ जय माँ बगलामुखी, जय माँ बगलामुखी, तेरे चरणों में शीश नवाऊँ। दुख-संकट सब दूर करो माँ, तेरा नाम सदा मैं गाऊँ॥ पीले फूलों से तेरा श्रृंगार, मन में तेरी ज्योति जगाऊँ। तेरी कृपा की छाँव मिले माँ, जीवन सफल बनाऊँ॥ जय माँ बगलामुखी, जय माँ बगलामुखी, तेरी महिमा सबसे न्यारी। पीताम्बरा माँ शक्ति स्वरूपा, तू ही जग की पालनहारी॥ ॥ जय माँ बगलामुखी माता की जय ॥

माँ बगलामुखी मंत्र - जय माँ बगलामुखी — दिव्य भजन

1324 Views
843 Shares

इस मंत्र को शेयर करें

अभी चल रहे मंत्र को अपने प्रियजनों के साथ साझा करें।

1 / 22
जय माँ बगलामुखी — दिव्य भजन

॥ साधना संबंधी निवेदन ॥

माँ बगलामुखी के मंत्र अत्यंत पवित्र एवं साधना प्रधान माने जाते हैं। मंत्र जाप करते समय श्रद्धा, शुद्ध भाव एवं नियमों का पालन करें। विशेष मंत्र साधना अथवा अनुष्ठान योग्य गुरु एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शन में करना अधिक उचित है।

॥ मंत्र साधना एवं आध्यात्मिक ज्ञान ॥

माँ के दिव्य मंत्र

माँ बगलामुखी, माँ प्रत्यंगिरा, माँ चामुंडा एवं शाबर मंत्रों से संबंधित महत्वपूर्ण आध्यात्मिक जानकारी एवं मंत्रों का विस्तृत संग्रह।

माँ के सभी प्रमुख मंत्र

यहाँ माँ बगलामुखी, माँ प्रत्यंगिरा, माँ चामुंडा तथा शाबर मंत्रों से संबंधित आध्यात्मिक सामग्री एक स्थान पर उपलब्ध है।

01

माँ बगलामुखी के दिव्य मंत्र

माँ बगलामुखी की आराधना, मंत्र एवं आध्यात्मिक साधना से संबंधित जानकारी।

मंत्र देखें →
02

माँ प्रत्यंगिरा एवं माँ चामुंडा

दोनों दिव्य शक्तियों के स्वरूप, महत्व एवं आध्यात्मिक परिचय।

विस्तृत परिचय →
03

शाबर मंत्र

शाबर मंत्र परंपरा और उससे संबंधित आध्यात्मिक जानकारी।

शाबर मंत्र देखें →
॥ माँ बगलामुखी मंत्र साधना ॥

माँ बगलामुखी के प्रमुख मंत्र

1

माँ बगलामुखी का मुख्य मंत्र
36 अक्षर मंत्र

॥ मुख्य मंत्र ॥
ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्ववां कीलय बुद्धि विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा।

इस मंत्र का जाप शत्रुओं की वाणी, कार्य और विचारों को स्तब्ध करने की साधना में किया जाता है। यह मंत्र विशेष रूप से मानसिक शांति और आत्मबल की साधना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

2

बगलामुखी बीज मंत्र

॥ बीज मंत्र ॥
ह्लीं

ह्लीं को माँ बगलामुखी साधना में प्रमुख बीज मंत्र के रूप में माना जाता है। इसका जाप श्रद्धा एवं उचित साधना-विधि के साथ किया जाता है।

3

लक्ष्मी प्राप्ति हेतु मंत्र

॥ श्री महालक्ष्मी मंत्र ॥
ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महालक्ष्मी नमः।

यह मंत्र धन, समृद्धि और देवी लक्ष्मी की कृपा की प्रार्थना के लिए किया जाता है।

4

बगलामुखी माता का विशेष
शत्रु नाशक मंत्र

॥ विशेष मंत्र ॥
ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय हुम् फट् स्वाहा।

यह मंत्र शत्रुओं की नकारात्मकता और दुष्प्रभावों से सुरक्षा की आध्यात्मिक साधना में प्रयोग किया जाता है।

5

बगलामुखी संकट निवारण मंत्र

॥ संकट निवारण मंत्र ॥
ॐ बगलामुखि सर्वदुष्टवर्गविघ्ननाशिनी महाक्रूरविध्वंसिनि स्वाहा।

यह मंत्र जीवन में आने वाले संकटों, विघ्नों और नकारात्मक परिस्थितियों से रक्षा की प्रार्थना के लिए किया जाता है।

6

बगलामुखी देवी का
विजय मंत्र

॥ विजय मंत्र ॥
ॐ बगलामुखि सर्वशत्रु विनाशाय वशीकरणाय सर्वसिद्ध्यं सुखं शान्ति समृद्धि का वर्धनाय सर्वमंगलप्रदाय स्वाहा।

यह मंत्र विजय, सफलता, सुख-शांति और समृद्धि की आध्यात्मिक प्रार्थना के लिए किया जाता है।

7

बगलामुखी मंत्र सिद्धि के लिए

॥ मंत्र सिद्धि मंत्र ॥
ॐ बगलामुखि महाक्रूर विक्राल वीर हुम् फट् स्वाहा।

यह मंत्र माँ बगलामुखी के उग्र स्वरूप की साधना से संबंधित माना जाता है और साधना में आत्मबल तथा नकारात्मकता से रक्षा की प्रार्थना के लिए किया जाता है।

8

मानसिक शक्ति वर्धन के लिए
बगलामुखी मंत्र

॥ मानसिक शक्ति मंत्र ॥
ॐ बगलामुखि ह्लीं बगलामुखि वशीकरणय हुम् फट् स्वाहा।

यह मंत्र मानसिक स्थिरता, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा की साधना के लिए किया जाता है।

9

जीवन में समृद्धि लाने के लिए
बगलामुखी मंत्र

॥ समृद्धि एवं शांति मंत्र ॥
ॐ बगलामुखि सर्वरोग निवारणी बगलामुखि सर्वदुष्ट विनाशिनी बगलामुखि स्वाहा।

यह मंत्र स्वास्थ्य, शांति, सकारात्मकता और जीवन में सुख-समृद्धि की प्रार्थना के लिए किया जाता है।

10

पारिवारिक सुख और शांति के लिए
बगलामुखी मंत्र

॥ पारिवारिक शांति मंत्र ॥
ॐ बगलामुखि सर्वविघ्न निवारणी सर्वकष्ट नाशिनी स्वाहा।

यह मंत्र परिवार में सुख-शांति, आपसी प्रेम और सकारात्मक वातावरण की प्रार्थना के लिए किया जाता है।

11

तंत्र-मंत्र और नकारात्मकता
निवारण के लिए

॥ रक्षा मंत्र ॥
ॐ बगलामुखि सर्व तंत्र मन्त्र शत्रुजाल निवारणी स्वाहा।

यह मंत्र नकारात्मक ऊर्जा और भय से आध्यात्मिक सुरक्षा की प्रार्थना के लिए किया जाता है।

12

बगलामुखी मंत्र
विशिष्ट विजय के लिए

॥ विशिष्ट विजय मंत्र ॥
ॐ बगलामुखि सिद्धिशक्ति महाक्रूरा विक्रालां स्तम्भय वशीकुरुं शत्रुनाशाय स्वाहा।

यह मंत्र विजय, आत्मबल और कठिन परिस्थितियों में सकारात्मक शक्ति की प्रार्थना के लिए किया जाता है।

॥ माँ प्रत्यंगिरा एवं माँ चामुंडा देवी ॥

माँ प्रत्यंगिरा एवं माँ चामुंडा देवी का विस्तृत परिचय

1

माँ प्रत्यंगिरा देवी
का विस्तृत परिचय

॥ माँ प्रत्यंगिरा देवी ॥
प्रत्यंगिरा देवी को सनातन धर्म में अत्यंत उग्र, रहस्यमयी और तांत्रिक शक्ति की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। इन्हें अथर्वण भद्रकाली, निकुम्भिला देवी और नारसिंही शक्ति के नाम से भी जाना जाता है।

उत्पत्ति:
पौराणिक मान्यता के अनुसार जब भगवान नरसिंह ने हिरण्यकशिपु का वध किया, तब उनका क्रोध शांत नहीं हो रहा था। उस समय आदिशक्ति ने प्रत्यंगिरा देवी का रूप धारण किया और उस उग्र ऊर्जा को संतुलित किया।

स्वरूप:
• सिंहमुखी (सिंह के मुख वाली)
• विशाल काले या श्याम वर्ण की
• खुले केश
• अनेक भुजाएँ
• हाथों में त्रिशूल, खड्ग, डमरू, पाश, ढाल आदि
• सिंह या सिंहासन पर विराजमान

2

माँ प्रत्यंगिरा देवी
विशेषताएँ एवं उपासना

॥ माँ प्रत्यंगिरा की विशेषताएँ ॥
माँ प्रत्यंगिरा देवी की उपासना आध्यात्मिक शक्ति, सुरक्षा और साधना से जुड़ी मानी जाती है।

विशेषताएँ:
• तंत्र-मंत्र बाधा का नाश
• शत्रु विनाश
• ग्रह दोष शमन
• काला जादू, अभिचार, मारण-उच्चाटन से रक्षा
• आध्यात्मिक शक्ति की वृद्धि

उपासना:
माँ प्रत्यंगिरा की साधना सामान्यतः योग्य गुरु के मार्गदर्शन में की जाती है। इनकी साधना अत्यंत प्रभावशाली मानी गई है।

3

माँ चामुंडा देवी
का विस्तृत परिचय

॥ माँ चामुंडा देवी ॥
चामुंडा देवी देवी दुर्गा का अत्यंत उग्र और रक्षक स्वरूप हैं।

"चामुंडा" नाम दो असुरों — चण्ड और मुण्ड के वध के कारण पड़ा। इसका वर्णन देवी महात्म्य में मिलता है।

माँ चामुंडा की उत्पत्ति:
जब असुरराज शुम्भ और निशुम्भ के सेनापति चण्ड और मुण्ड ने देवी पर आक्रमण किया, तब देवी के ललाट से एक भयंकर शक्ति प्रकट हुई। उसने दोनों असुरों का वध किया।

तब देवी ने कहा कि तुमने चण्ड और मुण्ड का वध किया है, इसलिए संसार में तुम्हारा नाम चामुंडा होगा।

4

माँ चामुंडा देवी
का स्वरूप

॥ माँ चामुंडा का स्वरूप ॥
माँ चामुंडा देवी का स्वरूप अत्यंत शक्तिशाली और रक्षक माना जाता है।

• काले या गहरे नीले वर्ण की
• कृशकाय (दुबली)
• गले में नरमुंडों की माला
• हाथों में त्रिशूल, खड्ग, खप्पर
• जटा युक्त केश
• तीन नेत्र
• शव पर या सिंह पर विराजमान

5

माँ चामुंडा के प्रमुख रूप

॥ चामुंडा के प्रमुख रूप ॥
विभिन्न तांत्रिक और शाक्त परंपराओं में माँ चामुंडा के अनेक रूप बताए गए हैं।

1. उग्र चामुंडा
• शत्रु नाश
• तांत्रिक बाधा विनाश
• सवारी: शव या प्रेत

2. रुद्र चामुंडा
• युद्ध विजय
• साहस और पराक्रम
• सवारी: सिंह

3. सिद्ध चामुंडा
• साधना सिद्धि
• तंत्र एवं योग में सफलता
• सवारी: सिंहासन

4. भद्र चामुंडा
• कल्याणकारी रूप
• परिवार की रक्षा
• सवारी: सिंह

5. महाचामुंडा
• नवदुर्गा एवं दशमहाविद्याओं की संयुक्त शक्ति
• सवारी: सिंह

6

माँ चामुंडा की सवारी

॥ माँ चामुंडा की सवारी ॥
अलग-अलग ग्रंथों और परंपराओं में माँ चामुंडा की सवारी विभिन्न बताई गई है।

सिंह
शक्ति और पराक्रम का प्रतीक

शव
मृत्यु पर विजय का प्रतीक

प्रेत
भूत-प्रेत और अदृश्य शक्तियों पर नियंत्रण

गीदड़ (सियार)
श्मशान की अधिष्ठात्री शक्ति का प्रतीक। कई तांत्रिक चित्रों में चामुंडा के साथ गीदड़ दर्शाया जाता है।

7

माँ चामुंडा का
आध्यात्मिक महत्व

॥ आध्यात्मिक महत्व ॥
माँ चामुंडा केवल विनाश की देवी नहीं हैं, बल्कि वे शक्ति, निर्भयता और आध्यात्मिक संरक्षण का प्रतीक मानी जाती हैं।

• भय का नाश करती हैं
• अकाल मृत्यु से रक्षा करती हैं
• नकारात्मक शक्तियों का विनाश करती हैं
• साधक को निर्भय बनाती हैं
• आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करती हैं

8

माँ प्रत्यंगिरा और
माँ चामुंडा का संबंध

॥ आदिशक्ति के उग्र स्वरूप ॥
तांत्रिक परंपरा में माँ प्रत्यंगिरा और माँ चामुंडा दोनों को आदिशक्ति के उग्र स्वरूप माना जाता है।

माँ प्रत्यंगिरा
अभिचार, तंत्र-बाधा और शत्रु शक्तियों के नाश से संबंधित शक्ति के रूप में मानी जाती हैं।

माँ चामुंडा
दुष्ट प्रवृत्तियों, भय, अहंकार और आसुरी शक्तियों के संहार से संबंधित शक्ति के रूप में मानी जाती हैं।

दोनों देवियाँ साधक को निर्भयता, शक्ति और आध्यात्मिक संरक्षण प्रदान करने वाली मानी जाती हैं।

जय माँ प्रत्यंगिरा।
जय माँ चामुंडा।
जय माँ बगलामुखी।

॥ शाबर मंत्र साधना ॥

माँ बगलामुखी के शाबर मंत्र

1

माँ बगलामुखी
शाबर मंत्र

॥ शाबर मंत्र ॥
ॐ मलयाचल बगला भगवती महाक्रूरी महाकराली राजमुख बन्धनं ग्राममुख बन्धनं ग्रामपुरुष बन्धनं कालमुख बन्धनं चौरमुख बन्धनं व्याघ्रमुख बन्धनं सर्वदुष्ट ग्रह बन्धनं सर्वजन बन्धनं वशीकुरु हुं फट् स्वाहा।
2

माँ प्रत्यंगिरा
शाबर मंत्र

॥ प्रत्यंगिरा मंत्र ॥
ॐ प्रत्यंगिरायै नमः प्रत्यंगिरे सकल कामान साधय मम रक्षां कुरु कुरु सर्वान शत्रुन खादय खादय, मारय मारय, घातय घातय, ॐ ह्रीं फट स्वाहा।
3

त्रैलोक्यस्तम्भिनी विद्या
बगलामुखी शाबर मंत्र

॥ त्रैलोक्यस्तम्भिनी मंत्र ॥
त्रैलोक्यस्तम्भिनी विद्या सर्वशत्रुवशङ्करी आकर्षणकरी उच्चाटनकरी विद्वेषणकरी जारणकरी मारणकरी जृम्भणकरी स्तम्भनकरी ब्रह्मास्त्रेण सर्ववश्यं कुरु कुरु ॐ ह्रां बगलामुखि हुं फट् स्वाहा।
4

दुष्ट एवं नकारात्मक
शक्ति निवारण मंत्र

॥ रक्षा मंत्र ॥
ॐ ह्रां द्राविणि द्राविणि भ्रामिणि एहि एहि सर्वभूतान् उच्चाटय उच्चाटय सर्वदृष्टान निवारय निवारय भूत प्रेत पिशाच डाकिनी शाकिनीः छिन्धि छिन्धि खड्गेन भिन्धि भिन्धि मुद्गरेण संमारय संमारय, दुष्टान् भक्षय भक्षय, ससैन्यं भूपर्ति कीलय कीलय मुखस्तम्भनं कुरु कुरु ॐ ह्रां बगलामुखि हुं फट् स्वाहा।
5

सर्व रक्षा
बगलामुखी शाबर मंत्र

॥ सर्व रक्षा मंत्र ॥
आत्मा रक्षा ब्रह्य रक्षा विष्णु रक्षा रुद्र रक्षा इन्द्र रक्षा अग्रि रक्षा यम रक्षा नैऋत रक्षा वरुण रक्षा वायु रक्षा कुवेर रक्षा ईशान रक्षा सर्व रक्षा भूत प्रेत पिशाच डाकिनी शाकिनी रक्षा अग्निवेताल रक्षा गा गन्धर्व रक्षा तयार सर्वरक्षां कुरु कुरु, व्याघ्र गज सिंह रक्षा रणतस्कर रक्षा तस्मात् सर्व बन्धयामि ॐ ह्रां बगलामुखि हुं फट् स्वाहा।
6

बगलामुखी
विशेष शाबर मंत्र

॥ विशेष मंत्र ॥
ॐ ह्रीं भो बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय हीं ॐ स्वाहा। ॐ ऐं ह्रीं श्रीं बगलामुखि एहि एहि पूर्वदिशायां बन्धय बन्धय इन्द्रस्य मुखं स्तम्भय स्तम्भय इन्दशस्त्रं निवारय निवारय सर्वसैन्यं कीलय कीलय पच पच मथ मथ मर्दय मर्दय ॐ ह्रीं वश्यं कुरु कुरु ॐ ह्रां बगलामुखि हुं फट् स्वाहा।
7

पीताम्बरा देवी
अग्निदिशा मंत्र

॥ अग्निदिशा मंत्र ॥
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं पीताम्बरे एहि एहि अग्निदिशायां बन्धय बन्धय अग्निमुखं स्तम्भय स्तम्भय अग्निशस्त्रं निवारय निवारय सर्वसैन्यं कीलय कीलय पंच पच मथ मथ मर्दय मर्दय ॐ ह्रीं अग्निस्तम्भं कुरु कुरु ॐ ह्रां बगलामुखि हूं फट् स्वाहा।
8

महिषमर्दिनि
दक्षिण दिशा मंत्र

॥ दक्षिण दिशा मंत्र ॥
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं महिषमर्दिनि एहि एहि दक्षिणदिशायां बन्धय बन्धय यमस्य मुखं स्तम्भय स्तम्भय यमशस्वं निवारय निवारय सर्वसैन्यं कीलय कीलय पच पच मथ मथ मर्दय मर्दय ॐ ह्रीं हज्जृम्भणं कुरु कुरु ॐ ह्रां बगलामुखि हुं फट् स्वाहा।
9

चण्डिके
नैऋत्य दिशा मंत्र

॥ नैऋत्य दिशा मंत्र ॥
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं चण्डिके एहि एहि नैऋत्यदिशायां बन्धय बन्धय नैऋत्यमुखं स्तम्भय स्तम्भय नैऋत्यशस्त्रं निवारय निवारय सर्वसैन्यं कीलय कीलय पच पच मथ मथ मर्दव मर्दय ॐ ह्रीं वश्यं कुरु कुरु ॐ ह्लां बगलामुखि हुं फट् स्वाहा।
10

करालनयने
पश्चिम दिशा मंत्र

॥ पश्चिम दिशा मंत्र ॥
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं करालनयने एहि एहि पश्चिमदिशायां बन्धय बन्धय वरुणमुखं स्तम्भय स्तम्भय वरुणशस्वं निवारय निवारय सर्वसैन्यं कीलय कीलय पच पच मथ मथ मर्दय मर्दय ॐ ह्रीं वश्यं कुरु कुरु ॐ ह्रां बगलामुखि हुं फट् स्वाहा।
11

कालिके
वायव्य दिशा मंत्र

॥ वायव्य दिशा मंत्र ॥
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं कालिके एहि एहि वायव्यदिशायां बन्धय बन्धय वायुमुखं स्तम्भय स्तम्भय वायुशस्त्रं निवारय निवारय सर्वसैन्यं कीलय कीलय पच पच मथ मथ मर्दय मर्दय ॐ ह्रीं वश्यं कुरु कुरु ह्रां बगलामुखि हुं फट् स्वाहा।
12

महात्रिपुरसुन्दरि
उत्तर दिशा मंत्र

॥ उत्तर दिशा मंत्र ॥
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं महात्रिपुरसुन्दरि एहि एहि उत्तरदिशायां बन्धय बन्धय कुबेरमुखं स्तम्भय स्तम्भय कुबेरशस्वं निवारय निवारय सर्वसैन्यं कीलय कीलय पच पच मथ मथ मर्दय मर्दय ॐ ह्रीं वश्यं कुरु कुरु ॐ ह्रां बगलामुखि हुं फट् स्वाहा।
13

महाभैरवि
ईशान दिशा मंत्र

॥ ईशान दिशा मंत्र ॥
ॐ ऐं ऐं महाभैरवि एहि एहि ईशानदिशायां बन्धय बन्धय ईशानमुखं स्तम्भय स्तम्भय ईशानशस्वं निवारय निवारय सर्वसैन्यं कीलय कीलय पच पच मथ मथ मर्दय मर्दय ॐ ह्रीं वश्यं कुरु करु ॐ ह्रां बगलामुखि हुँ फट् स्वाहा।
14

गाङ्गेश्वरि
ऊर्ध्व दिशा मंत्र

॥ ऊर्ध्व दिशा मंत्र ॥
ॐ ऐं ऐं गाङ्गेश्वरि एहि एहि ऊर्ध्वदिशायां बन्धय बन्धय ब्रह्माणं चतुर्मुखं स्तम्भय स्तम्भय ब्रह्मशस्त्रं निवारय निवारय सर्वसैन्य कीलय कीलय पच पच मथ मथ मर्दय मर्दय ॐ ह्रीं वश्यं कुरु कुरु ॐ ह्रां बगलामुखि हुँ फट् स्वाहा।
15

ललितादेवि
अंतरिक्ष दिशा मंत्र

॥ अंतरिक्ष दिशा मंत्र ॥
ॐ ऐं ऐं ललितादेवि एहि एहि अन्तरिश्वदिशायां बन्धय बन्धय विष्णुमुखं स्तम्भय स्तम्भय विष्णुशस्वं निवारय निवारय सर्वसैन्यं कीलय कीलय पच पच मथ मथ मर्दय मर्दय ॐ ह्रीं वश्यं कुरु कुरु ॐ ह्रां बगलामुखि हुँ फट् स्वाहा।
16

दुष्ट मंत्र एवं यंत्र
बंधन मंत्र

॥ बंधन मंत्र ॥
दुष्टमंत्रम् दुष्टयन्त्रं दुष्टपुरुषं बन्धयामि शिखां बन्ध ललाटे बन्ध भुवी बन्ध नेचे बन्ध कर्णी बन्थ नाही वय ओठी बन्ध अधरों बन्ध जिह्वां बन्ध रसनां बन्ध बुद्धिं बन्ध कण्ठं बन्ध हृदयं बन्ध क्षिं बन्ध हस्ती बन्ध नाधि बन्ध लिङ्ग बन्ध गुहां बन्ध ऊरू बन्ध जानू बन्ध जड्ङ्ग्रे बन्ध गुल्फौ बन्ध पादौ बन्ध स्वर्ग मृत्यु पातालं बन्ध बन्य बगलामुखि हुं फट् स्वाहा। रक्ष रक्ष ॐ ह्रीं वश्यं कुरु कुरु ॐ ह्रीं बगलामुखि हुं फट् स्वाहा।
17

इन्द्र देव
बगलामुखी मंत्र

॥ इन्द्र मंत्र ॥
ॐ ऐं ऐं ॐ ह्रीं बगलामुखि इन्द्राय सुराधिपतये ऐरावतवाहनाय स्वेतवर्णाय वज्रहस्ताय सपरिवाराय एरि एहि मम विघ्नान निरासय निरासय विभञ्जय विभञ्जय ॐ ह्रीं अमकस्य मुखं स्तम्भय स्तम्भय ॐ ही विस्फोटकादीन नाशय नाशय ॐ अमुकस्य मुखं भेदय भेदय ॐ ह्रीं वश्यं कुरु ॐ ह्रीं बगलामुखि हुं फट् स्वाहा।
18

अग्नि देव
बगलामुखी मंत्र

॥ अग्नि मंत्र ॥
ॐ ऐं ऎ ॐ ह्रीं बगलामुखि अग्नये तेजोधिपतये छागवाहनाय रक्तवर्णाय शक्तिहस्ताय सपरिवाराय एहि एहि भम विघ्नान् विभञ्जय विभञ्जय ॐ ह्रीं अमुकस्य मुखं स्तम्भय स्तम्भय ॐ ह्रीं अमुकस्य मुखं भेदव भेदय ॐ ह्रीं वश्यं कुरु कुरु ॐ ह्रीं बगलामुखि हुं फट् स्वाहा।
19

यम देव
बगलामुखी मंत्र

॥ यम मंत्र ॥
ॐ ऐं ऐं ॐ ह्रीं बगलामुखि यमाय प्रेताधिपतये महिषवाहनाय कृष्णवर्णाय दण्डहस्ताय सपरिवाराय एहि एहि मम विघ्नान् विभञ्जय विभञ्जय ॐ ह्रीं अमुकस्य मुखं स्तम्भय स्तम्भय ॐ ह्रीं अमुकस्य मुखं भेदब भेदय ॐ ह्रीं वश्यं कुरु कुरु ॐ ह्रीं बगलामुखि हुं फट् स्वाहा।
20

वरुण देव
बगलामुखी मंत्र

॥ वरुण मंत्र ॥
ॐ ऐं ऐ ॐ ह्रीं बगलामुखि वरुणाय जलाधिपतये मकरवाहनाय श्वेतवर्णाय पाशहस्ताय सपरिवाराय एहि एहि मम विघ्नान् विभञ्जय विभञ्जय ॐ ह्रीं अमुकस्य मुखं स्तम्भय स्तम्भय ॐ ह्रीं अमुकस्य मुखं भेदय भेदय ॐ ह्रीं वश्यं कुरु कुरु ॐ ह्रीं बगलामुखि हुं फट् स्वाहा।
21

वायु देव
बगलामुखी मंत्र

॥ वायु मंत्र ॥
ॐ ऐं ऐं ॐ ह्रीं बगलामुखि वायव्याय मृगवाहनाय धूम्रवर्णाय ध्वजाहस्ताय सपरिवाराय एहि एहि मम विघ्नान् विभञ्जय विभञ्जय ॐ ह्रीं अमुकस्य मुखं स्तम्भय स्तम्भय ॐ ह्रीं अमुकस्य मुखं भेदय भेदय ॐ ह्रीं वश्यं कुरु कुरु ॐ ह्रीं बगलामुखि हुं फट् स्वाहा।
22

ईशान देव
बगलामुखी मंत्र

॥ ईशान मंत्र ॥
ॐ ऐं ऐ ॐ ह्रीं बगलामुखि ईशानाय भूताधिपतये वृषभवाहनाय कर्पूरवर्णाय त्रिशूलहस्ताय सपरिवाराय एहि एहि मम विघ्नान् विभञ्जय विभञ्जय ॐ ह्रीं अमुकस्य मुखं स्तम्भय स्तम्भय ॐ ह्रीं अमुकस्य मुखं भेदय भेदय ॐ ह्रीं वश्यं कुरु कुरु ॐ ह्रीं बगलामुखि हुं फट् स्वाहा।
23

ब्रह्मा देव
ऊर्ध्व दिशा मंत्र

॥ ब्रह्मा मंत्र ॥
ॐ ऐं ऐं ॐ ह्रीं बगलामुखि ब्रह्मणे ऊर्ध्वदिग्लोकपालाधिपतये हंसवाहनाय श्वेतवर्णाय कमण्डलुहस्ताय सपरिवारय एहि एहि मम विघ्नान् विभञ्जय विभञ्जय ॐ ह्रीं अमुकस्य मुखं स्तम्भय स्तम्भय ॐ हाँ अमुकस्य मुखं भेदय भेदय ॐ ह्रीं वश्यं कुरु कुरु ॐ ह्रीं बगलामुखि हुं फट् स्वाहा।
24

वैष्णवी शक्ति
बगलामुखी मंत्र

॥ वैष्णवी मंत्र ॥
ॐ ऐं ऐं ॐ ह्रीं बगलामुखि वैष्णवीसहिताय नागाधिपतये गरुडवाहनाय श्यामवर्णाय चक्रहस्ताय सपरिवाराय एहि एहि मम विघ्नान् विभञ्जय विभञ्जय ॐ ह्रीं अमुकस्य मुखं स्तम्भय स्तम्भय ॐ ह्रीं अमुकस्य मुखं भेदय भेदव ॐ ह्रीं वश्यं कुरु कुरु ॐ ह्रीं बगलामुखि हुं फट् स्वाहा।
25

ज्वालामालिनी देवी
शाबर मंत्र

॥ ज्वालामालिनी मंत्र ॥
ॐ ज्वालामालिन्यै नमः ज्वालामालिनी-ज्वालामालिनी सर्व भूत जात वेद से ज्वल: ज्वल: प्रज्जवल प्रज्जवल ह्लां बगलामुखी ॐ फट् स्वाहा।
26

शत्रु स्तम्भन
शाबर मंत्र

॥ शत्रु स्तम्भन मंत्र ॥
मम् सर्वान शत्रुन् गतिम् स्तम्भय बुद्धिंस्तम्भय वाक्यम् स्तम्भय आम ह्रीं क्लीम् ग्लोम् हूं फट स्वाहा !!!
27

बगलामुखी
बीज शाबर मंत्र

॥ बीज मंत्र ॥
ॐ आम ह्रीं क्लीम् ग्लोम् हूं फट् स्वाहा।
28

श्रीं मंत्र

॥ श्रीं मंत्र ॥
ॐ श्रीं दोम् फट् स्वाहा।
29

क्लीं मंत्र

॥ क्लीं मंत्र ॥
ॐ क्लीं दोम् फट् स्वाहा।
30

ह्रीं मंत्र

॥ ह्रीं मंत्र ॥
ॐ ह्रीं दोम् फट् स्वाहा।
31

कालरूप एवं अस्त्ररूप
शाबर मंत्र

॥ विशेष शाबर मंत्र ॥
ॐ फट् फट् कालरूप फट् फट् अस्त्ररूप फट् फट् वाराह रूप हुं फट् स्वाहा।