॥ जय बाबा क्रोध भैरव ॥

श्री क्रोध भैरव जी के बारे में

पीताम्बरा लोक माँ बगलामुखी धाम में भगवान शिव के उग्र एवं दिव्य भैरव स्वरूप श्री क्रोध भैरव जी महाराज का पावन स्थान है। बाबा क्रोध भैरव जी योगिनी शक्ति के साथ विराजमान होकर धाम की दिव्य साधना-परंपरा और शक्ति-क्षेत्र की रक्षा के भाव का प्रतीक माने जाते हैं।

॥ जय बाबा क्रोध भैरव ॥

श्री क्रोध भैरव जी दिव्य शक्ति एवं धाम के रक्षक

पीताम्बरा लोक माँ बगलामुखी धाम में श्री क्रोध भैरव जी महाराज भगवान शिव के उग्र एवं दिव्य भैरव स्वरूप के रूप में श्रद्धा एवं साधना के केंद्र हैं। उनकी उपासना साहस, निर्भयता, आत्मबल और दिव्य संरक्षण की भावना से जुड़ी हुई है।

सनातन एवं तांत्रिक परंपरा में भैरव भगवान शिव के अत्यंत प्रभावशाली स्वरूप माने गए हैं। क्रोध भैरव जी का ‘क्रोध’ अधर्म, अन्याय, अहंकार, भय और नकारात्मक शक्तियों के विरुद्ध जागृत दिव्य रौद्र ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।

श्री क्रोध भैरव जी
॥ दिव्य भैरव आराधना ॥

श्री क्रोध भैरव जी की पूजा एवं आराधना

बाबा क्रोध भैरव जी की आराधना श्रद्धा, साधना एवं संकल्प के साथ की जाती है। भक्त अपने जीवन में साहस, आत्मबल, निर्भयता एवं आध्यात्मिक संरक्षण की भावना से बाबा के श्री चरणों में प्रार्थना अर्पित करते हैं।

श्री क्रोध भैरव पूजा

बाबा क्रोध भैरव जी के श्री चरणों में श्रद्धा एवं संकल्प के साथ विशेष पूजा एवं प्रार्थना अर्पित की जाती है।

श्री क्रोध भैरव हवन

मंत्रों एवं आहुति के साथ बाबा क्रोध भैरव जी की आराधना एवं हवन श्रद्धापूर्वक संपन्न किया जाता है।

विशेष संकल्प पूजा

भक्त के नाम एवं गोत्र के साथ विशेष संकल्प लेकर बाबा क्रोध भैरव जी के श्री चरणों में प्रार्थना एवं आराधना अर्पित की जाती है।

॥ बाबा क्रोध भैरव जी की आराधना ॥

बाबा क्रोध भैरव जी की आराधना के प्रमुख स्वरूप

बाबा क्रोध भैरव जी की उपासना परंपरा में साधना, हवन एवं संकल्प के माध्यम से भक्त साहस, आत्मबल, निर्भयता और आध्यात्मिक संरक्षण की भावना से जुड़ते हैं।

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भैरव मंत्र साधना

बाबा क्रोध भैरव जी की आराधना में मंत्र-जाप एवं साधना को श्रद्धा, अनुशासन एवं आध्यात्मिक भाव के साथ किया जाता है।

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भैरव हवन साधना

विशेष मंत्रों के साथ हवन एवं आहुति अर्पित कर बाबा क्रोध भैरव जी की आराधना श्रद्धापूर्वक की जाती है।

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विशेष संकल्प सेवा

भक्त के नाम एवं गोत्र के साथ बाबा क्रोध भैरव जी के श्री चरणों में विशेष संकल्प एवं प्रार्थना अर्पित की जाती है।

॥ भैरव आराधना प्रक्रिया ॥

श्री क्रोध भैरव जी की पूजा एवं आराधना की प्रक्रिया

01

संकल्प

भक्त के नाम एवं गोत्र के साथ बाबा क्रोध भैरव जी की पूजा का विशेष संकल्प लिया जाता है।

02

आराधना

बाबा क्रोध भैरव जी की श्रद्धापूर्वक पूजा एवं आराधना कर दिव्य शक्ति और आत्मबल की प्रार्थना की जाती है।

03

हवन

मंत्रों के साथ हवन एवं आहुति अर्पित कर बाबा क्रोध भैरव जी की आराधना संपन्न की जाती है।

04

प्रार्थना

बाबा के श्री चरणों में भय, नकारात्मकता एवं बाधाओं से उबरने तथा साहस, विवेक और आत्मबल के जागरण की प्रार्थना की जाती है।

॥ जय बाबा क्रोध भैरव ॥

श्री क्रोध भैरव जी की पूजा एवं आराधना

हे बाबा क्रोध भैरव जी महाराज, पीताम्बरा लोक की इस पावन भूमि पर विराजमान होकर अपने सभी भक्तों एवं साधकों की रक्षा करें। हमारे जीवन से भय, नकारात्मकता और बाधाएँ दूर हों, हमारे भीतर साहस, विवेक एवं आत्मबल का जागरण हो और हमारा जीवन धर्म, साधना, सेवा एवं सद्मार्ग की ओर अग्रसर हो।

शक्ति, साहस और अधर्म के विनाश की दिव्य अधिष्ठात्री

माँ चामुंडा देवी भगवती आदिशक्ति के अत्यंत प्रचंड एवं वीर स्वरूपों में पूजित हैं। उनका नाम देवी के उन शक्तिशाली रूपों से जुड़ा है जिन्होंने अधर्म और आसुरी शक्तियों का दमन किया। माँ चामुंडा का स्वरूप भक्तों के लिए साहस, निर्भयता, शक्ति और धर्म की रक्षा का प्रतीक है।

देवी के चामुंडा स्वरूप की पौराणिक कथा देवी महात्म्य की उस परंपरा से जुड़ी है जिसमें माँ ने चंड और मुंड नामक असुरों का संहार किया। इसी कारण देवी को चामुंडा नाम प्राप्त हुआ। उनका यह स्वरूप यह संदेश देता है कि जब अधर्म और आसुरी शक्तियाँ बढ़ती हैं, तब आदिशक्ति धर्म की रक्षा के लिए प्रचंड रूप धारण करती हैं।

माँ चामुंडा का उग्र स्वरूप वास्तव में भक्तों के लिए भय का नहीं, बल्कि निर्भयता का प्रतीक है। उनकी आराधना मनुष्य को अपने भीतर के भय, दुर्बलता, आलस्य, अहंकार और नकारात्मकता से संघर्ष करने की प्रेरणा देती है।

पीताम्बरा लोक माँ बगलामुखी धाम में माँ चामुंडा की आराधना धाम की दिव्य त्रिशक्ति को पूर्णता प्रदान करती है। माँ बगलामुखी विजय एवं स्तम्भन शक्ति का, माँ प्रत्यंगिरा संरक्षण एवं रक्षाशक्ति का तथा माँ चामुंडा साहस, शक्ति एवं अधर्म-विनाश के दिव्य भाव का प्रतिनिधित्व करती हैं।

माँ चामुंडा के चरणों में श्रद्धा अर्पित करने वाला भक्त जीवन में सत्य, धर्म और साहस के साथ आगे बढ़ने का संकल्प करता है। माँ का आशीर्वाद भक्तों के भीतर आत्मविश्वास और आध्यात्मिक दृढ़ता का संचार करने वाली प्रेरणा के रूप में स्मरण किया जाता है।

जय माँ चामुंडा।
जय आदिशक्ति।
धर्म की विजय हो, अधर्म का नाश हो।