बगलामुखी बीज मंत्र लेखन पुस्तिका
माँ बगलामुखी की साधना एवं मंत्र शक्ति को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से बगलामुखी बीज मंत्र लेखन पुस्तिका का संकल्प लिया गया है।
शक्ति से साधना, साधना से सेवा और सेवा से राष्ट्र उत्थान
इस लिंक को शेयर करके आप संकल्प एवं सेवा की जानकारी अधिक लोगों तक पहुँचा सकते हैं।
माँ बगलामुखी की दिव्य शक्ति, सनातन संस्कृति और मानव सेवा को जन-जन तक पहुँचाते हुए एक ऐसे समाज का निर्माण करना, जहाँ आध्यात्मिक चेतना के साथ सेवा, संस्कार, प्रकृति और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी भी जागृत हो।
दिव्य शक्ति और आत्मविश्वास का जागरण
आध्यात्मिक साधना और चेतना का विस्तार
मानवता और जरूरतमंदों की निस्वार्थ सेवा
सनातन संस्कृति और संस्कारों का संरक्षण
प्रकृति, पर्यावरण और पृथ्वी की रक्षा
माँ बगलामुखी की साधना एवं मंत्र शक्ति को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से बगलामुखी बीज मंत्र लेखन पुस्तिका का संकल्प लिया गया है।
माँ बगलामुखी शक्ति, विजय, आत्मबल एवं नकारात्मक
शक्तियों के शमन की अधिष्ठात्री देवी के रूप में
पूजित हैं। उनकी साधना में बीज मंत्र का विशेष
आध्यात्मिक महत्व माना जाता है।
इसी आध्यात्मिक चेतना को समाज तक पहुँचाने के
उद्देश्य से बगलामुखी बीज मंत्र लेखन पुस्तिका
तैयार की गई है।
पुस्तिका में माँ बगलामुखी के पवित्र बीज मंत्र
“ह्लीं” के लेखन को केंद्र में रखा गया है।
मंत्र लेखन साधक को नियमित अभ्यास, एकाग्रता और
आध्यात्मिक अनुशासन की ओर प्रेरित करता है।
ह्लीं
माँ बगलामुखी बीज मंत्र
मंत्र लेखन • साधना • एकाग्रता • आध्यात्मिक चेतना
हमारा उद्देश्य केवल एक पुस्तिका उपलब्ध कराना नहीं,
बल्कि मंत्र साधना, सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक
चेतना के माध्यम से समाज में सकारात्मक ऊर्जा एवं
आत्मविश्वास का प्रसार करना है।
माँ बगलामुखी की कृपा एवं आशीर्वाद से यह आध्यात्मिक
प्रयास अधिक से अधिक साधकों तक पहुँचे और सनातन
मंत्र परंपरा के प्रति श्रद्धा एवं जागरूकता बढ़े—
यही हमारा संकल्प है।
प्रकृति और पृथ्वी को बचाने का पावन अभियान। वृक्षारोपण, औषधीय पौधों और पर्यावरण जागरूकता के माध्यम से धरती को पुनः हरा-भरा बनाने का प्रयास।
पीठाधीश्वर आशुतोष बगलामुखी जी महाराज द्वारा संचालित
प्रकृति बचाने का यह पावन संकल्प माँ बगलामुखी की दिव्य
कृपा और गुरुजी के आशीर्वाद से प्रारम्भ किया जा रहा है।
आज मानव ने विकास के नाम पर धरती को कंक्रीट के जंगल
में बदल दिया है। वनों की कटाई, प्रदूषण और असंतुलित
मौसम ने प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित किया है।
ऐसे समय में माँ बगलामुखी धाम ने संकल्प लिया है —
जितना हो सके उतना वृक्षारोपण करें और प्रकृति को
पुनः जीवित करें।
जहाँ वृक्ष हैं, वहीं जीवन है।
वृक्ष लगाना केवल सेवा नहीं, माँ धरती की पूजा है।
बांस, चंदन, सागौन, अश्वगंधा, हल्दी, अंजीर जैसे
जीवनदायी पौधों के रोपण द्वारा धरती को हराभरा बनाने
का प्रयास किया जा रहा है।
हर भक्त एक पौधा — धरती बचेगी, जीवन बचेगा।
मातृशक्ति, भक्ति और सनातन संस्कृति का शक्तिशाली संगम। हर माता-बहन में निहित शक्ति और चेतना को जागृत करने का पावन संकल्प।
मातृशक्ति, भक्ति और सनातन संस्कृति का शक्तिशाली संगम।
माँ बगलामुखी धाम, कादेड़ा चाकसू जयपुर से प्रारम्भ हुआ
6,51,000 दुर्गा-स्वरूप माता–बहनों का यह पावन संकल्प
एक दिव्य चेतना के रूप में आगे बढ़ रहा है।
पीठाधीश्वर आशुतोष बगलामुखी जी महाराज के सान्निध्य में
इस अभियान का उद्देश्य मातृशक्ति को अपनी अंतर्निहित
शक्ति का बोध कराना तथा सनातन संस्कृति के प्रति
जागरूकता बढ़ाना है।
हर माता-बहन स्वयं जगदम्बा का अंश है। मातृशक्ति जागेगी
तो परिवार मजबूत होगा, परिवार मजबूत होगा तो समाज और
राष्ट्र मजबूत होगा।
यह केवल संगठन नहीं — संस्कृति का पुनर्जागरण है।
माँ बगलामुखी की असीम कृपा से एवं समस्त सहयोगकर्ताओं के साथ यह मिशन उन सभी लोगों तक भोजन पहुँचाने का संकल्प है जिनकी थाली आज भी खाली है।
माँ बगलामुखी की असीम कृपा से एवं समस्त सहयोगकर्ताओं
के साथ, यह मिशन उन सभी लोगों तक भोजन पहुँचाने का
संकल्प है जिनकी थाली आज भी खाली है।
इस मिशन की शुरुआत माता बगलामुखी धाम जयपुर से की जा रही
है, जिसका विस्तार धीरे-धीरे देशभर के गाँव-गाँव और
नगर-नगर में किया जाएगा।
यहाँ जरूरतमंद लोगों को सुबह और शाम दोनों समय
निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराने का संकल्प है।
यह माँ बगलामुखी का प्रसाद और दिव्य आशीर्वाद है।
एक छोटी सी रोटी किसी भूखे व्यक्ति के लिए जीवन की
सबसे बड़ी आशा बन सकती है।
कोई भी सहयोगकर्ता मात्र ₹5 प्रति रोटी का सहयोग देकर
इस महासेवा में सहभागी बन सकता है।
माँ बगलामुखी धाम का संकल्प है —
भारत का कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे।
माँ का अन्न — माँ का प्रसाद, हर जीव की सेवा हमारा संकल्प।”
हमारे सभी संकल्पों का आधार केवल कोई एक अभियान नहीं, बल्कि मानवता, सनातन संस्कृति, प्रकृति और राष्ट्र के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
हमारा प्रयास है कि माँ बगलामुखी की साधना केवल मंदिर और पूजा तक सीमित न रहे, बल्कि उसका सकारात्मक प्रभाव समाज, परिवार, प्रकृति और राष्ट्र के जीवन में दिखाई दे।
हमारा लक्ष्य एक ऐसे समाज का निर्माण करना है जहाँ धर्म केवल पूजा का विषय न होकर सेवा, संस्कार, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र निर्माण का आधार बने।
जब एक व्यक्ति बदलता है तो परिवार बदलता है, परिवार बदलता है तो समाज बदलता है और समाज बदलता है तो राष्ट्र की दिशा बदलती है।
इसी विचार के साथ हमारा प्रयास है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कम से कम एक सेवा, एक संस्कार और एक पर्यावरण संरक्षण का संकल्प अवश्य ले।
शक्ति से साधना, साधना से सेवा और सेवा से राष्ट्र उत्थान।
माँ बगलामुखी की कृपा से मानवता, संस्कृति, प्रकृति और राष्ट्र के लिए समर्पित होकर हम सब मिलकर एक सकारात्मक और संस्कारित समाज का निर्माण करें।
॥ जय माँ बगलामुखी ॥ 🙏माँ बगलामुखी की असीम कृपा से एवं समस्त सहयोगकर्ताओं के साथ, यह मिशन उन सभी लोगों तक भोजन पहुँचाने का संकल्प है जिनकी थाली आज भी खाली है।
इस मिशन की शुरुआत माता बगलामुखी धाम जयपुर से की जा रही है, जिसका विस्तार धीरे-धीरे देशभर के गाँव-गाँव और नगर-नगर में किया जाएगा।
यहाँ जरूरतमंद लोगों को सुबह और शाम दोनों समय निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराने का संकल्प है।
यह माँ बगलामुखी का प्रसाद और दिव्य आशीर्वाद है। एक छोटी सी रोटी किसी भूखे व्यक्ति के लिए जीवन की सबसे बड़ी आशा बन सकती है।
कोई भी सहयोगकर्ता मात्र ₹5 प्रति रोटी का सहयोग देकर इस महासेवा में सहभागी बन सकता है।
माँ बगलामुखी धाम का संकल्प है — भारत का कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे।
मातृशक्ति, भक्ति और सनातन संस्कृति का शक्तिशाली संगम।
माँ बगलामुखी धाम, कादेड़ा चाकसू जयपुर से प्रारम्भ हुआ 6,51,000 दुर्गा-स्वरूप माता–बहनों का यह पावन संकल्प एक दिव्य चेतना के रूप में आगे बढ़ रहा है।
पीठाधीश्वर आशुतोष बगलामुखी जी महाराज के सान्निध्य में इस अभियान का उद्देश्य मातृशक्ति को अपनी अंतर्निहित शक्ति का बोध कराना तथा सनातन संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
हर माता-बहन स्वयं जगदम्बा का अंश है। मातृशक्ति जागेगी तो परिवार मजबूत होगा, परिवार मजबूत होगा तो समाज और राष्ट्र मजबूत होगा।
यह केवल संगठन नहीं — संस्कृति का पुनर्जागरण है।
पीठाधीश्वर आशुतोष बगलामुखी जी महाराज द्वारा संचालित प्रकृति बचाने का यह पावन संकल्प माँ बगलामुखी की दिव्य कृपा और गुरुजी के आशीर्वाद से प्रारम्भ किया जा रहा है।
आज मानव ने विकास के नाम पर धरती को कंक्रीट के जंगल में बदल दिया है। वनों की कटाई, प्रदूषण और असंतुलित मौसम ने प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित किया है।
ऐसे समय में माँ बगलामुखी धाम ने संकल्प लिया है — जितना हो सके उतना वृक्षारोपण करें और प्रकृति को पुनः जीवित करें।
जहाँ वृक्ष हैं, वहीं जीवन है। वृक्ष लगाना केवल सेवा नहीं, माँ धरती की पूजा है।
बांस, चंदन, सागौन, अश्वगंधा, हल्दी, अंजीर जैसे जीवनदायी पौधों के रोपण द्वारा धरती को हराभरा बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
हर भक्त एक पौधा — धरती बचेगी, जीवन बचेगा।
सनातन संस्कृति केवल हमारी परंपरा नहीं बल्कि हमारे जीवन मूल्यों, संस्कारों, आध्यात्मिक चेतना और मानवता के प्रति जिम्मेदारी का आधार है।
हमारा संकल्प है कि आने वाली पीढ़ियों तक सनातन संस्कृति, भारतीय संस्कार, आध्यात्मिक ज्ञान और राष्ट्र भावना को सही रूप में पहुँचाया जाए।
जब व्यक्ति अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानता है, तब उसके भीतर आत्मविश्वास, अनुशासन, सेवा और सकारात्मक सोच का विकास होता है।
इसी चेतना को परिवार, समाज और राष्ट्र तक पहुँचाना इस संकल्प का प्रमुख उद्देश्य है।
संस्कार से समाज • चेतना से राष्ट्र
श्री पीताम्बरा लोक – माँ बगलामुखी धाम
इस लिंक को खोलने पर कीर्तन की रात की पूरी जानकारी दिखाई देगी।
Feedback Reviews section को अपने मित्रों और परिवार के साथ Share करें।